Monday, April 19, 2021

जैव विविधता वर्ग 10

 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

1. विभिन्नता क्या है ? जननिक विभिन्नता एवं कायिक विभिन्नता का वर्णन करे | 

उत्तर :- एक ही प्रकार में जनकों से उत्पन्न विभिन्न संतानों का अवलोकन करने पर हम पाते है की उनमे कुछ-न-कुछ अन्तर होता है | उनके रंग-रूप, शारीरिक गठन, आवाज, मानसिक क्षमता आदि में काफी विभिन्नता होती है | एक ही प्रजाति के जीवों में दिखने वाले ऐसी अंतर आनुवंशिक अंतर या वातावरणीय दशाओं में अंतर के कारण होता है | एक ही जाती के विभिन्न सदस्यों में पाए जाने वाले इन्ही अंतरों को विभिन्नता कहते है | अर्थात विभिन्नता सजीवो के ऐसे गुण है जो उसे अपने जनको अथवा अपने ही जाती के अन्य सदस्यों के उसी गुण के मूल स्वरूप से भिन्नता को दर्शाते है | 

जननिक विभिन्नता - इस प्रकार की विशेषताएँ जनन कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तन के कारण होता है | ऐसी विभिन्नताएँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशागत होती है | इसे आनुवांशिक विभिन्नता भी कहते है | ऐसी विभिन्नताओं में कुछ जन्म के समय से प्रकट हो जाती है | जैसे- आँखों एवं बालों का रंग/शारीरिक गठन, लम्बाई में परिवर्तन आदि जन्म के बाद की विभिन्नताएँ है | 

कायिक विभिन्नताएँ - ऐसी विभिन्नताएँ कई कारणों से होती है | जैसे जलवायु एवं वातावरण का प्रभाव, पोषण के प्रकार, परिवेशीय जीवों के साथ परस्पर व्यवहार इत्यादि से ऐसी विभिन्नताएँ आ सकती है | ऐसी विभिन्नताएँ क्रोमोसोम या जीव परिवर्तन के कारण नहीं होती है | अत ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंशागत नहीं होती है | ऐसी विभिन्नताएँ उपार्जित होती है | इस विभिन्नता का जैव विकास में कोई महत्त्व नहीं है | 

2. मेंडल द्वारा मटर पर किये गए एकसंकर संस्करण के प्रयोग तथा निष्कर्ष का वर्णन करें | 

उत्तर :- ग्रेगर जान मेंडल को आनुवंशिकी का पिटा कहा जाता है | मटर के पौधों पर किये गए अपने प्रयोगों के निष्कर्षो को उन्होंने 1866 में Annual Proceeding of the Netural Society of Brunn में प्रकाशित किया | इसने मटर जैसे साधारण पौधे का चयन किया | मटर के पौधे के गुण स्पष्ट तथा विपरीत लक्षणों वाले होते है | मेंडल ने प्रयोग में विपरीत गुण वाले लम्बे तथा बौने पौधे पर विचार किया | उसने बौने पौधे के सारे फूलों को खोलकर उनके पुंकेसर हटा दिय | फिर उसने एक लम्बे पौधे के फूलों को खोलकर उनके परागकणों को निकालकर बने पौधों के फलों के वर्तिकाग्रों पर गिरा दिया | मेंडल ने इन दोनों जनक पौधों को जनक पीढ़ी कहा | इसने जो बीज बने उनसे उत्पन्न सारे पौधे लम्बे नस्ल के हुए | इस पीढ़ी के पौधों को मेंडल ने प्रथम सतंती कहा | इसे F1 से इंगित किया | इस F1 पीढ़ी के पौधे में दोनों जनक (लम्बे एवं बौने ) के गुण मौजूद थे | चूँकि लम्बेपन वाला गुण बौनेपन पर अधिक प्रभावी था | अत बौनेपन का गुण मौजूद होने के बाबजूद पौधे लम्बे हुए | मेंडल ने लम्बे पौधे के लिए 'T' तथा बौने के लिए 't' का प्रयोग किया | इस तरह प्रथम पीढ़ी के सभी पौधे 'Tt' गुनेवाले हुए | इनमे 'T' (लम्बापन), 't' (बौनेपन) पर प्रभावी था | इस कारण F1 पीढ़ी यानी प्रथम पीढ़ी के सभी पौधे लम्बे हुए |

चूँकि दोनों जनक पौधे शुद्ध रूप से लम्बे तथा बौने थे, इसलिए शुद्ध लम्बे पौधों को TT तथा शुद्ध बौने पौधों को tt द्वारा सूचित किया गया | F1 पीढ़ी के पौधों में दोनों गुण मौहुद थे, इस कारण इन्हें संकर नस्ल कहा गया | F1 पीढ़ी के पौधों का जब आपस में प्रजनन कराया गया अगली पीढ़ी (F1) के पौधों में लम्बे और बौने का अनुपात 3 : 1 पाया गया अर्थात कुल पौधों में से 75 प्रतिशत पौधे लम्बे (TT) तथा शेष संकर नस्ल के लम्बे (Tt) पौधे पैदा हुए अर्थात संकर नस्ल के लम्बे पौधे के प्रभावी गुण (T) तथा अप्रभावी गुण (t) के मिश्रण थे | 


इस आधार पर F2 पीढ़ी के पौधों के अनुपात 1 : 2 : 1 यानि TT, 2Tt तथा tt (एक भाग शुद्ध लम्बे दो भाग संकर नस्ल के लम्बे तथा एक भाग शुद्ध बौने) से दर्शाया गया | 3 : 1 के अनुपात को लक्षणप्ररुपी अनुपात तथा 1 : 2 : 1 को जीन प्ररुपी अनुपात कहा जाता है | मेंडल इस प्रयोग को एकसंकर संकरण कहा जाता है | 


जीनप्ररुपी अनुपात :- TT : Tt : tt = 1 : 2 : 1 

लक्षणप्ररुपी अनुपात :- लम्बा : बौना = 3:1 


3. मनुष्य में लिंग-निर्धारण के विधि का वर्णन करें | 


उत्तर :- हम जानते है की लैंगिक प्रजनन में नर युग्मक तथा मादा युग्मक के संयोजन से युग्मनज का निर्माण होता है | जो विकसित होकर अपने जनकों जैसा नर या मादा जीव बन जाता है | मनुष्य एक जटिल प्राणी है | इसमे लिंग निर्धारण क्रिया को समझाने के लिए क्रोमोसोम का अध्ययन करना पड़ता है |

मनुष्य में 23 जोड़े क्रोमोसोम होते है | इनमे 22 जोड़े क्रोमोसोम एक ही प्रकार के होते है, जिसे आटोसोम कहते है | तेइसवाँ जोड़ा भिन्न आकार का होता है, जिसे लिंग-क्रोमोसोम कहते है | ये दो प्रकार के होते है- X और Y, X क्रोमोसोम अपेक्षाकृत बहुत छोटे आकार का होता है | नर में X और Y क्रोमोसोम मौजूद होते है, पर मादा में Y क्रोमोसोम लिंग-क्रोमोसोम के रूप में होते है | ये X और Y क्रोमोसोम ही मनुष्य में लिंग-निर्धारण के लिए उत्तरदायी होते है | 

कक्षा~10वीं जीवविज्ञान  आनुवंशिकता तथा जैव विकास  दीर्घ उत्तरीय प्रश्न  Class 10th Biology  Heredity and Bio-evolution  Long answer questions  BharatiBhawan.org
भारती भवन 

युग्मकों के निर्माण के समय X और Y अलग-अलग युग्मकों में चले जाते है | अत नर में X और Y दो प्रकार के युग्मक बनते है, पर मादा में केवल X क्रोमोसोम वाले ही युग्मक बनते है | इन युग्मकों के निषेचन के फलस्वरूप नर एवं मादा बनते है| जिस युग्मनज में X, Y दोनों क्रोमोसोम पहुँच जाते है, वह नर (male) बन जाता है और जिसमे दोनों लिंग क्रोमोसोम X, X पहुँच जाते है वह मादा (female) बन जाता है | लिंग-निर्धारण के लिए इस मत को हेटेरोगैमेसिस का सिद्धांत कहते है | 

4. जैव विकास क्या है ? लामार्कवाद का वर्णन करें | 

उत्तर :- पृथ्वी पर वर्तमान जटिल प्राणियों का विकास प्रारम्भ में पाए जानेवाला सरल प्राणियों की परिस्थिति और वातावरण के अनुसार होनेवाले परिवर्तनों के कारण हुआ | सजीव जगत में होनेवाले इस परिवर्तन को जैव विकास कहते है | 

लामार्क फ्रांस का प्रसिद्ध वैज्ञानिक था | इसने सर्वप्रथम 1809 में जैव विकास के अपने विचारों की अपनी पुस्तक फिलासफिक, जूलाजिक में प्रकाशित किया | लामार्क के सिद्धांत को उपार्जित लक्षणों का वंशागति सिद्धांत कहते है | लामार्क के अनुसार जीवों की संरचना, कायिकी उनके व्यवहार पर वातावरण के परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ता है | लामार्क के अनुसार वे अंग जो जीवधारियों की अनुकूलता के लिए महत्वपूर्ण है बार-बार उपयोग में लाये जाते है, जिससे की उनका विकास होता है, लेकिन वैसे लक्षण जो अनुकूलता की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है या हानिकारक हो सकते है उनका उपयोग नहीं किया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे नष्ट हो जाते है |

5. डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत का वर्णन करें | 

उत्तर :- चार्ल्स डार्विन और वैलेस ने बाद में 'प्राकृतिक चयानावाद का सिद्धांत दिया, जिसे डार्विन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक में प्रस्तुत किया | इसे स्थापित करने में स्पेंसन (1858) नामक वैज्ञानिक ने भी योगदान दिया | डार्विन के सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक जीवधारी में संतानोंत्पति की अद्भुत क्षमता पायी जाती है, इसलिए एक अकेली प्रजाति पूरी पृथ्वी पेल सकती है | परिणामत आवास और भोजन की उपलब्धता के लिए इनमे अंतप्रजातीय और अंतर्जातीय और बीच-बीच में प्राकृतिक विपदाओं से भी संघर्ष करना पड़ता है, जिसे अस्तित्व के लिए संघर्ष कहा जाता है | स्पेंसर (1858) के अनुसार इस त्रिआयामी संघर्ष में सिर्फ वाही विजेता हो सकता है जिसके लक्षण अनुकूलतम हों | इस आधार पर डार्विन ने निषकर्ष निकाला की, "प्रकृति बार-बार परिवर्तनों के द्वारा किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवधारियों के विरुद्ध एक बल उत्पन्न करती है, जिसे प्राकृतिक चयन कहा जाता है | इसके कारण प्रतिकूल लक्षणों वाले जीवधारी नष्ट हो जाते है और अनुकूल लक्षणों वाले जीवधारियों का परोक्ष चयन हो जाता है |" यह सिद्धांत वास्तव में चावल चुनने के बदले कंकड़ चुनने की क्रिया है | लेकिन, प्रतिकूल लक्षण वाले जीवधारी तुरंत मर जाते है, ऐसे बात नहीं है: वास्तव में धीरे-धीरे उनका प्रजनन-दर घटता है और मृत्यु-दर बढ़ता है जिससे की सैकड़ो वर्षों में ये लुप्त होते है| डार्विन को आनुवंशिकता के कारणों का पता नहीं था, इसलिए वे वास्तव में यह नहीं बता सकते थे की लक्षण धीरे-धीरे क्यों बदलते है | लेकिन उन्होंने विभिन्नताएँ की पहचान की और नयी प्रजातियों की उत्पत्ति पर ठीक-ठीक प्रकाश डाला | 

6. आनुवंशिक विभिन्नता के स्रोतों का वर्णन करें | 

उत्तर :- जीवों में आनुवंशिक विभिन्नता उत्परिवर्तन के कारण होता है तथा नई जाती के विकास में इसका योगदान हो सकता है | क्रोमोसोम पर स्थित जीन की संरचना तथा स्थिति में परिवर्तन ही उत्परिवर्तन का कारण है | आनुवंशिक विभिन्नता का दूसरा कारण आनुवंशिक पुनर्योग भी है | आनुवंशिक पुनर्योग के कारण संतानों के क्रोमोसोम में जीन के गुण (संरचना तथा क्रोमोसोम पर उनकी स्थिति ) अपने जनकों के जीव से भिन्न हो सकते है | कभी-कभी ऐसे नए गुण जीवों को वातावरण में अनुकूलित होने में सहायक नहीं भी होते है | ऐसे स्थिति में आपसी स्पर्द्धा, रोग इत्यादि कारणों से वैसे जीव विकास की दौड़ में विलुप्त हो जाते है | बचे हुए जीव ऐसे लाभदायक गुणों को अपने संतानों में संचारित करते है | इस तरह प्रकृति नए गुणों वाले कुछ जीव का चयन कर लेती है तथा कुछ को निष्कासित कर देती है | प्राकृतिक चयन द्वारा नए गुणों वाले जीवों का विकास इसी प्रकार से होता है | 

7. पृथ्वी पर जीवों की उत्पत्ति पर प्रकाश डालें | 

उत्तर :- एक ब्रिटिश वैज्ञानिक जे. बी. एस. हाल्डेन ने सबसे पहली बार सुझाव दिया था की जीवों की उत्पत्ति उन अजैविक पदार्थों से हुई होगी जो पृथ्वी की उत्पत्ति के समय बने थे | सन 1953 में स्टेनल एल. मिलर और हाल्डेन सी. डरे ने ऐसे कृत्रिम वातावरण का निर्माण किया था जो प्राचीन वातावरण के समान था | इस वातावरण में आक्सीजन नहीं थी | इसमे अमोनिया, मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड थे | उसमे एक पात्र में जल भी था, जिसका तापमान 100०C से कम रखा गया था | जब गैसों के मिश्रण से चिनगारियाँ उत्पन्न की गई जो आकाशीय बिजलियाँ के समान थी | मीथेन से 15% कार्बन सरल कार्बनिक यौगिक में बदल गए | इनमे एमिनो अम्ल भी संश्लेषित हुए जो प्रोटीन के अणुओं का निर्माण करते है | इसी आधार पर हम कह सकते है की जिवानो की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है | 

8. जीवों में जाती उदभवन की प्रक्रिया कैसे संपन्न होता है ?

उत्तर :- नई स्पीशीज के उदभव में वर्त्तमान स्पीशीज के सदस्यों का परिवर्तनशील पर्यावरण में जीवित बने रहना है | इन सदस्यों को नए प्रयावरण में जीवित रहने के लिए कुछ बाह्य लक्षणों में परिवर्तन करना पड़ता है | अत भावी पीढ़ी के सदस्यों में शारीरिक लक्षणों में परिवर्तन दिखाई देने लगते है | जो संभोग क्रिया के द्वारा अगली पीढ़ी में हस्तांतरित हो जाते है परन्तु यदि दूसरी कालोनी के नर एवं मादा जीव वर्नामान पर्यावरण में संभोग करेंगे तब उत्पन्न होने वाली पीढ़ी के सदस्य जीवित नहीं रह सकेंगे | 

इसके अतिरिक्त अंतप्रजनन अर्थात एक ही प्रजातियों के बीच आपस में प्रजनन, आनुवंशिक विचलन तथा प्राकृतिक चुनाव के द्वारा होनेवाले जाती उदभवन उन जीवों में हो सकते है जिनमे केवल लैंगिक जनन होता है | अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न जीवों में तथा स्व-परागन द्वारा उत्पन्न पौधों में जाती-उद्द्भवन की संभावना नहीं होती है | 

 

लामार्क की यह अवधारणा थी की परिवर्तन वातावरण के कारण जीवो के अंगों का उपयोग अधिक या कम होता है | जिन अंगों का उपयोग अधिक होता है वे अधिक विकसित हो जाता है | जिनका उपयोग नहीं होता है उनका धीरे-धीरे ह्रास हो जाता है | यह परिवर्तन वातावरण अथवा जंतुओं के उपयोग पर निर्भर करता है | इस कारण जंतु के शारीर में जो परिवर्तन होता है उसे उपार्जित लक्षण कहा जाता है | ये लक्षण वंशागत होते है अर्थात एक पीढ़ी से दुसरे पीढ़ी में प्रजनन के द्वारा चले जाते है | ऐसा लगातार होने से कुछ पीढियां के पश्चात उनकी शारीरिक रचना बदल जाती है तथा एक नए प्रजाति का विकास होता है | हालाकि लामार्कवाद के सिद्धांत का कई वैज्ञानिक ने खंडन किया है |

Wednesday, October 7, 2020

मानव ह्रदय

ह्रदय की संरचना :

हृदय मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो बगहा के मध्य में थोड़ी सी बाएं ओर स्थित होता है और यह 1 दिन में लगभग 100000 बार एवं 1 मिनट में लगभग 72 बार धड़कता  है,  इसके एक धड़कन में 0.8 सेकंड लगते हैं केंद्रीय कौन है रक्त पर दबाव बनाकर पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण करता है करता है। हृदय को पोषण एवं ऑक्सीजन रक्त के द्वारा मिलता है जो कोरोनरी धमनियों द्वारा प्रदान किया जाता है।

मनुष्य के हृदय का भार लगभग 250 से 300 ग्राम तक होता है मनुष्य का दिल 1 मिनट में 70 मिलीलीटर रक्त पंप  करता है । एवं 1 दिन में 7600 लीटर रक्त पंप करता है। 

ह्रदय पेरीटोनियम की एक दोहरी झिल्ली  के अंदर बंद होता है ,जिसे हृदयावरण या पेरिकार्डियम कहते हैं।  पेरिकार्डियम की दोनों झिल्लियों  के बीच की गुहा  को पेरिकार्डियल गुहा कहते हैं.  इस गुहा में पेरिकार्डियल द्रव भरा  रहता है , यह द्रव  हृदय को बाहरी आघातों  तथा  हृदय गति के दौरान हृदय और पेरिकार्डियल झिल्ली के बीच होने वाली संभावित घर्षणों  से बचाता है।

मनुष्य तथा मैमलिया वर्ग के जन्तुओ के हृदय में चार वेश्म होते है , दायाँ एवं बायाँ अलिंद  तथा दायाँ एवं बायाँ निलय। 

दायाँ एवं बायाँ  अलिंद ह्रदय के चौड़े  अग्र भाग में स्थित होते है, ये दोनों एक विभजिका (अन्तरालिंद भित्ति ) सेप्टम द्वारा अलग होते हैं।  । 
 दायाँ एवं बायाँ  निलय  ह्रदय के संकरे   पश्च  भाग में स्थित होते है, ये दोनों  अन्तरानिलय  भित्ति  द्वारा अलग होते हैं।  

दायाँ अलिंद , दायें निलय में एक छिद्र दायाँ अलिंद-निलय छिद्र ,के द्वारा खुलता है।  इस छिद्र पर एक त्रिदलि कपाट पाया जाता है।  जो रक्त को दाये  अलिंद से दाये निलय में जाने तो देता है लेकिन वापस आने नहीं देता है। 

इसी प्रकार बायाँ अलिंद , बाँये निलय में बायाँ अलिंद-निलय छिद्र के द्वारा खुलता है. इस छिद्र पर द्विदलि कपाट पाया जाता है. जो रक्त को बाँये अलिंद से बाँये निलय में जाने तो देता है, लेकिन वापस आने नहीं देता है।




 

Sunday, October 4, 2020

परिवहन तंत्र-3 प्रश्न उत्तर


ज्ञान कोचिंग बनारपुर ,बक्सर। 


1. जीवों  के शरीर में पदार्थों के स्थानांतरण के लिए एक तंत्र को क्या कहते हैं ?

परिवहन तंत्र

समस्त उपयोगी पदार्थों को उनके मूल स्रोतों से शरीर की कोशिकाओं तक लाना तथा अनुपयोगी और हानिकारक पदार्थों को कोशिकाओं से बाहर निकाल कर उन अंगों तक पहुंचाना जहां से वे शरीर के बाहर निकाल दिए जाएं पदार्थों का परिवहन कहलाता है और पदार्थों के परिवहन या स्थानांतरण के लिए विकसित तंत्र को परिवहन तंत्र कहते हैं।

2. संवहन उत्तक किसे कहते हैं? 

जाइलम और फ्लोएम को

जटिल बहू कोशिकीय पौधों में जल एवं खाद्य पदार्थों के परिवहन हेतु विशिष्ट उत्तक पाए जाते हैं जिन्हें संवहन उत्तक कहते हैं।

 खाद्य पदार्थों का परिवहन पत्तियों से पौधों के सभी अंगों में फ्लोएम उत्तक द्वारा संपन्न होता है।

जाइलम में जल एवं खनिज लवण का परिवहन ऊपर की एक ही दिशा में होता है जबकि  फ्लोएम में खाद्य पदार्थों का परिवहन ऊपर और नीचे दोनों दिशा में  होता है।

3. चालिनी नलिकाएं कहां पाई जाती है ?    फ्लोएम में।

4. वाष्पोत्सर्जन किसे कहते हैं?

पौधों के वायवीय भागों से जल का रंध्रो द्वारा वाष्प के रूप में निष्कासन की क्रिया वाष्पोत्सर्जन कहलाती है।

5. स्थानांतरण क्या है?

पौधे के एक भाग से दूसरे भाग में खाद्य पदार्थों के जलीय घोल के आने जाने को खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण कहा जाता है। पौधों में सुक्रोज के रूप में खाद्य पदार्थ का स्थानांतरण होता है।

मनुष्य में खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण ग्लूकोस,  एमिनो अम्ल, वसा अम्ल आदि पोषक तत्व के रूप में होता है।

6. पौधे खनिज लवणों का अवशोषण किस रूप में करते हैं?

पौधे खनिज लवणों  अवशोषण आयन के रूप में करते हैं।

7. खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण क्यों जरूरी होता है?

खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण ऊर्जा उत्पादन एवं उपयोग के लिए  जरूरी है।

8. रक्त के विभिन्न आवाजो के नाम लिखें?

रक्त के विभिन्न  अवयव RBC,WBC, platelets एवं प्लाज्मा।

9. रक्त परिसंचरण तंत्र के तीन प्रमुख अवयवों के नाम लिखें?

        रक्त, वाहिकाएं , एवं     ह्रदय

10. रक्त किस प्रकार का उत्तक है ?

        संयोजी उत्त क

क्योंकि रक्त अपने प्रवाह के दौरान शरीर के सभी उत्तक का संयोजन करता है इसलिए यह तरल संयोजी उत्तक कहलाता है।


11. लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण शरीर में कहां होता है?

लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण अस्थि मज्जा में होता है लेकिन गर्भस्थ शिशु में लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण प्लीहा एवं यकृत में होता है।

12. मनुष्य में लाल और श्वेत रक्त कोशिकाओं का अनुपात क्या है? 600:1

13. रक्त लाल क्यों दिखते हैं? हिमोग्लोबिन के उपस्थिति के कारण

14. मनुष्य के हृदय में चार कौन-कौन से वेशम होते? 

                बायाँ  अलिंद, दायाँ  अलिंद, बायाँ निलय, दायाँ निलय

16.शरीर के सभी भागों से अशुद्ध रक्त को हृदय के दाएं अलिंद में ले जाने वाली रक्त वाहिनी ओं के नाम लिखें,?

    शिरायें 

17. हृदय के बाएं अलिंद निलय छिद्र पर स्थि त कपाट का नाम लिखें ?

द्वीदली कपाट

हृदय के दाएं आलिंद निलय छिद्र पर स्थित कपाट क को त्रिदलि  कपाट कहते हैं

18.फेफड़े से शुद्ध रक्त को बाय अलिंद में ले जाने वाली रक्त वाहिनी का नाम क्या है ?

                फुफ्फुस शिरा 

19. हृदय के वेश्मों  संकुचन क्या कहलाता है?
              
संकुचन सिस्टॉल  तथा शिथिलन  को डायस्टॉल 

20. शरीर की ऐसी धमनी का नाम लिखिए जिसमें अशुद्ध  रक्त प्रवाहित होता है?  

                फुफ्फुस धमनी

21. शरीर की ऐसी शिरा का नाम लिखें जिसमें शुद्ध रक्त  प्रवाहित होता है?
             
फुफ्फुस शिरा 

22. विभिन्न शीरिकाएँ आपस में जुड़ कर रक्त वाहिनी का निर्माण करती है? शिरा

23. एक ऐसे एक कोशिकीय पौधे का नाम बताएं जिसमें परिवहन विसरण के द्वारा होता है?

क्लैडोमोनास और युग्लीना 

24.पौधों में जल एवं खाद्य पदार्थों के स्थानांतरण करने वाले उत्तक को क्या कहते हैं?

संवहन उत्तक

25. जल संवहन उत्तक में पाए जाने वाली लंबी तथा बेलनाकार नलिकाएं क्या कहलाती हैं ?
    जाइलम

26. जाइलम और फ्लोएम में किसक कोशिकाएं मृत होती है? जाइलम की

27.जाइलम तथा फ्लोएम में कौन सा संवहन उत्तक खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण करता है?

        फ्लोयम 

28.पौधे में जल खनिज लवण और खाद्य पदार्थों को पौधे के शीर्ष भाग तक पहुंचाने वाली क्रिया क्या कहलाती है?

        संवहन

29.  रुधिर किस प्रकार का उत्तक है?  संयोजी उत्तक 

30. दायाँ  और बायाँ  अलिंद एक दूसरे से किस रचना के द्वारा अलग होते हैं?

अंतरा अलिंद भित्ति

31. उस शिरा का नाम बताइए जिसमें शुद्ध या ऑक्सीजन जनित रक्त का प्रवाह होता है?

फुफ्फुस शिरा 

32.वैसा रक्त प्लाज्मा जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं नहीं पाई जाती है क्या कहलाता है?

सीरम

33. रक्त का संचार ज्यादा दबाव से किसमें होता है?

धमनियों में

34. रक्तचाप का माप  किस उपकरण से किया जाता है?

स्फिग्मोमैनोमीटर 

शिरा और धमनी में अंतर


रक्त एवं लसीका में अंतर स्पष्ट करें?





ह्रदय की संरचना एवं कार्य विधि:-



Saturday, October 3, 2020

रसायन सूत्र उत्तर Class-10

 

1. रसायन सूत्र 

S.No.

रसायन

सूत्र

1.

आक्सीजन

O₂

2.

नाइट्रोजन

N₂

3.

हाइड्रोजन

H₂

4.

कार्बन डाइऑक्साइड

CO₂

5.

कार्बन मोनोआक्साइड

CO

6.

सल्फर डाइऑक्साइड

SO₂

7.

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड

NO₂

8.

नाइट्रोजन मोनोऑक्साइड (नाइट्रिक ऑक्साइड)

NO

9.

डाईनाइट्रोजन ऑक्साइड (नाइट्रस ऑक्साइड)

N₂O

10.

क्लोरीन

Cl₂

11.

हाइड्रोजन क्लोराइड

HCl

12.

अमोनिया

NH₃   अम्ल

13.

हाइड्रोक्लोरिक एसिड

HCl

14.

सल्फ्यूरिक एसिड

H₂SO₄

15.

नाइट्रिक एसिड

HNO₃

16.

फॉस्फोरिक एसिड

H₃PO₄

17.

कार्बोनिक एसिड

H₂CO₃  क्षार

18.

सोडियम हाइड्राक्साइड

NaOH

19.

पोटेशियम हाइड्राक्साइड

KOH

20.

कैल्शियम हाइड्राक्साइड

Ca(OH)₂ लवण

21.

सोडियम क्लोराइड

NaCl

22.

कार्बोनेट सोडियम

Na₂CO₃

23.

कैल्शियम कार्बोनेट

CaCO₃

24.

कैल्शियम सल्फेट

CaSO₄

25.

अमोनियम सल्फेट

(NH₄)₂SO₄

26.

नाइट्रेट पोटेशियम

KNO₃

 आम रसायनों के व्यावसायिक एवं रासायनिक नाम

व्यावसायिक नाम — IAPUC नाम — अणु सूत्र

27.

चाक — कैल्सियम कार्बोनेट

CaCO

28.

अंगूर का सत — ग्लूकोज

C6H₁₂O6

29.

एल्कोहल

C₂H5OH

30.

कास्टिक पोटाश —  पोटेशियम हाईड्राक्साईड

KOH

31.

खाने का सोडा — सोडियम बाईकार्बोनेट

NaHCO₃

32.

चूना — कैल्सियम आक्साईड

CaO

33.

जिप्सम — कैल्सियम सल्फेट

CaSO₄.2H₂O

34.

टी.एन.टी. — ट्राई नाईट्रो टालीन

C6H₂CH₃(NO₂)₃

35.

धोने का सोडा — सोडियम कार्बोनेट

Na₂CO₃

36.

नीला थोथा — कॉपर सल्फेट

CuSO₄

37.

नौसादर — अमोनियम क्लोराईड

NH₄Cl

38.

फिटकरी — पोटैसियम एलुमिनियम सल्फेट

K₂SO₄Al₂(SO₄)₃.24H₂O

39.

बुझा चूना — कैल्सियम हाईड्राक्साईड

Ca(OH)₂

40.

मंड — स्टार्च

C6H12O6

41.

लाफिंग गैस — नाइट्रस आक्साईड

N₂O

42.

लाल दवा — पोटैसियम परमैगनेट

KMnO₄

43.

लाल सिंदूर — लैड परआक्साईड

Pb₃O₄

44.

शुष्क बर्फ — ठोस कार्बन-डाई-आक्साईड

CO₂

45.

शोरा — पोटैसियम नाइट्रेट

KNO₃

46.

सिरका — एसिटिक एसिड का तनु घोल

CH₃COOH

47.

सुहागा — बोरेक्स

Na₂B₄O7.10H₂O

48.

स्प्रिट — मैथिल एल्कोहल

CH₃OH

49.

स्लेट — सिलिका एलुमिनियम आक्साईड

Al₂O₃2SiO₂.2H₂O

50.

हरा कसीस — फैरिक सल्फेट

Fe₂(SO₄)₃

51.

साधारण नमक

NaCl

52.

बेकिंग सोडा

NaHCO₃

53.

धोवन सोडा

Na₂CO₃·10H₂O

54.

कास्टिक सोडा

NaOH

55.

सुहागा

Na₂B₄O₇·10H₂O

56.

फिटकरी

K₂SO₄·Al₂(SO₄)₃·24H₂O

57.

लाल दवा

KMnO₄

58.

कास्टिक पोटाश

KOH

59.

शोरा

KNO₃

60.

विरंजक चूर्ण

Ca(OCl)·Cl

61.

चूने का पानी

Ca(OH)₂

62.

जिप्सम

CaSO₄·2H₂O

63.

प्लास्टर ऑफ पेरिस

CaSO₄·½H₂O

64.

चॉक

CaCO₃

65.

चूना-पत्थर

CaCO₃

66.

संगमरमर

CaCO₃

67.

नौसादर

NH₄Cl

68.

लाफिंग गैस

N₂O

69.

लिथार्ज

PbO

70.

गैलेना

PbS

गै

3.परिवहन प्रश्न उत्तर

  वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1. सही उत्तर का संकेताक्षर (क , ख , ग या घ) लिखें। 1. एककोशिकीय शैवालों में जल का परिवहन होता है (क) परासरण द्वारा...